पीलु
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]पीलु संज्ञा पुं॰ [सं॰]
१. एक फलदार वृक्ष जिसे पीला या पीलू कहते हैं । विशेष—वैद्यक के अनुसार इसका फल स्वादु, कटु, तिक्त, उष्ण, भेदक तथा वायु, कफ, पित्त, गुल्म, प्रमेह, संधिवाक आदि का नाशक माना गया है । मीठा पीलु कम गरम और त्रिदोष- नाशक माना जाना है ।
२. फूल । पुष्प ।
३. परमाणु ।
४. हाथी ।
५. हड्डी का टुकड़ा । अस्थिखंड ।
६. तालवृक्ष का तना । तालकांड ।
७. बाण ।
८. कृमि ।
९. चने का साग ।
१०. सरपत या सरकंडे का फूल । शरतृणपुष्प ।
११. लाल कटसरैया । किंकिरात वृक्ष ।
१२. अखरोट का पेड़ ।
१३. कांचन देश का अखरोट ।
१४. हथेली । करतल ।
पीलु ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ पीलु]
१. एक प्रकार का काँटेदार वृक्ष जो दक्षिण भारत में अधिकता से होता है । विशेष—यह दो प्रकार का होता है छोटा और दुसरा बड़ा । इसमें एक प्रकार के छोटे छोटे लाल या काले फल लगते हैं जो वैद्यक के अनुसार वायु और गुल्म नाशक, पित्तद और भेदक माने जाते हैं । इसके ङरे डंठलों की दतवन अच्छी होती है । पुराणानुसार इसके फुले हुए वृक्षों को देखने से मनुष्य निरोग होता है ।
२. सफेद लंबे कीडों जो सड़ने पर फलों आदि में पड़ जाते हैं । मुहा॰—पीलु पड़ना=कीड़े उत्पन्न होना ।