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पुटपाक

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पुटपाक संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. पत्ते के दोनों में रखकर औषध पकाने का विधान (वैद्यक) । विशेष—पकाई जानेवाली ओषध को गंभारी, बरगद, जामुन, आदि के पत्तों में चारों ओर से लपेट दे और कसकर बाँध दे । फिर पत्तों के ऊपर गीली मिट्टी का अंगुल दो अंगुल मोटा लेप कर दे । फिर उस पिंड को उपले की आग में डाल दे । जब मिट्टी पककर लाल हो जाय तब समझे कि दवा पक गई । नेत्ररोगों में भी पुटपाक की रीती से औषध पकाकर उसका रस आँख में डालने का विधान है । स्निग्ध मांस और कुछ औषध लेकर द्रव पदार्थ मिलाकर पीस डाले फिर सबको ऊपर लिखित रीति से पकाकर उसका रस निचोड़कर आँख में डाले ।

२. मुँहबंद बरतन में दवा रखकर उसे गड्ढे के भीतर पकाने का विधान । विशेष—भस्म बनाने के लिये धातुएँ प्रायः इसी रीति से फुँकी जाती है ।

३. फुटपाक द्धारा सिद्ध रस या औषध । उ॰—रावण सो रस राज सुभट रस सहित लंक खल खलतो । करि पुटपार नाकनायक हित घने घने घर घलतो । —तुलसी (शब्द॰) ।