पुड़ँग
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]पुड़ँग संज्ञा पुं॰ [सं॰ पुटक] दे॰ 'पुटक' । उ॰—पड़ै पुड़ँग तहँ पेम की एक अखंडी धार । हरिया हरिजन पीवसी दुनियाँ सुधी न सार । —राम॰ धर्म॰, पृ॰ ६३ ।
पुड़ँग संज्ञा पुं॰ [सं॰ पुटक] दे॰ 'पुटक' । उ॰—पड़ै पुड़ँग तहँ पेम की एक अखंडी धार । हरिया हरिजन पीवसी दुनियाँ सुधी न सार । —राम॰ धर्म॰, पृ॰ ६३ ।