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पुरंजय

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पुरंजय ^१ वि॰ [सं॰ पुरञ्जय] पुर को जीतनेवाला ।

पुरंजय ^२ संज्ञा पुं॰ एक सूर्यवंशी राजा । काकुत्स्थ । विशेष—विष्णु पुराण में लिखा है कि एक बार दैत्यों से हारकर जब देवता विष्णु भगवान् के पास गए तब उन्होंने उनसे राजा पुरंजय के पास जाने के लिये कहा । भगवान् ने अपना कुछ अंश पुरंजय में डाल दिया । पुरंजय ने इंद्र से बैल बनने के लिये कहा । बैल के ककुद (डीले) पर बैठकर पुरंजय ने युदुध किया और दैत्यों को परास्त कर दिया । इसी से उनका नाम काकुत्स्थ पड़ा ।