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पुरञ्जन

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पुरंजन संज्ञा पुं॰ [सं॰ पुरञ्जन]

१. जीवात्मा । विशेष—भागवत में विस्तृत रूपकाख्यान के रूप में शरीररूपी पूर, उसके नवद्वार, त्वक्ख्पी प्राचीर और उसमें 'पुरंजन' नाम से जीवात्मा के निवास आदि का वणंन किया गया है ।

२. हरि । विष्णु (को॰) ।