पुष्यस्नान
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]पुष्यस्नान संज्ञा पुं॰ [सं॰] विघ्नशांति के लिये एक स्नान जो पूस के महीने में चंद्रमा के पुष्य नक्षत्र में होने पर होता है । विशेष— यह स्नान राजाओं के लिये है । कालिकापुराण और बृहतसंहिता में इस स्नान का पूरा विधान मिलता है । बृहतसंहिता के अनुसार उद्यान, देवमंदिर, नदीतट आदि किसी रमणीय और स्वच्छ स्थान पर मंडप बनवाना चाहिए और उसमें राजा को पुरोहितों और अमात्यों के सहित पूजन के लिये जाना चाहिए । पितरों और देवताओं का यथाविधि पूजन करके तब राजा पुष्यस्नान करे । जिस कलश के जल से राजा स्नान करनेवाले हों उसमें अनेक प्रकार के रत्न और मंगल द्रव्य पहले से डालकर रखे । पश्चिम ओर की वेदी पर बाघ या सिंह का चमड़ा बिछाकर उसपर सोने, चाँदी, ताँबे या गूलर की लकड़ी का पाटा रखा जाय । उसी पर राजा स्नान करे ।