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पूर्णप्रज्ञ

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पूर्णप्रज्ञ ^१ वि॰ [सं॰] जिसकी बुद्धि में कोई कमी या त्रुटि न हो । पूर्ण ज्ञानी । बहुत बुद्धिमान् ।

पूर्णप्रज्ञ ^२ संज्ञा पुं॰ पूर्णप्रज्ञदर्शन के कर्ता मध्वाचार्य । विशेष—ये वैष्णाव मत के संस्थापक आचार्यों में माने जाते है । वेदांतसूत्र पर इन्होंने 'माध्वभाष्य' नामक द्वैतक्षप्रतिपादक भाष्य लिखा है । हनुमान और भीम के बाद ये वायु के तीसरे अवतार माने गए हैं । अपने भाष्य में इन्होनें स्वयं भी यह बात लिखी है । इनका एक नाम आनंदतीर्थ भी है ।