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पूर्णावतार

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पूर्णावतार संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. ऐसा अवतार जो अशावतार न हो । किसी देवता का संपुर्ण कलाओं से युक्त अवतार । षोडश कलायुक्त अवतार ।

२. विष्णु के वे अवतार जो अंशावतार नहीं थे । विशेष—ब्रह्मवैवर्त पुराण के मत से विष्णु भगवान् के सोलहों कलायुक्त अवतार नृसिंह, राम और श्रीकृष्ण हैं ।