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पूर्मोपमा

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पूर्मोपमा संज्ञा पुं॰ [सं॰] उपमा अलंकार का वह भेद जिसमें उसके चारो अंग अर्थात्—उपमेय, उपमान, वाचक, और धर्म प्रकट रूप से प्रस्तुत हों । जैसे, इंद्र सो उदार है नरेंद्र मारवाड़ को, इसमें 'मारवाड़ को नरेंद्र' उपमेय, 'इंद्र' उपमान, 'सो' वाचक और 'उदार' धर्म चारों प्रस्तुत हैं ।