पैँठ
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]पैँठ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ पण्यस्थान, प्रा॰, पणट्ठा; अप॰ पइँट्ठा अथवा सं॰ पराय, प्रा॰ पण्ण (वणिअ) + अप॰, ठाय /?/ प्रा॰ ठाण, /?/सं॰ स्थान; अथवा देशी पइट्ठाण]
१. हाट । बाजार । उ॰—लेना हो सो लेइ ले उठी जात है पैंठ ।—कबीर (शब्द॰) ।
२. हट्टी । दुकान । उ॰—ऊधो ब्रज में पैंठ करी ।—सूर (शब्द॰) ।
३. वह दिन जिस दिन हाट लगती हो । बाजरा का दिन ।
४. दूसरी हुंडी जो महाजन पहली हुंडी के खो जाने पर लिख देता है ।