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पैँड़

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पैँड़ संज्ञा पुं॰ [हिं॰ पायँ + ड़ (प्रत्य॰) या सं॰, पाददण्ड, प्रा॰ पायडण्ड]

१. चलने में एक स्थान से उठाकर दूसरे स्थान पर पैर रखना । डग । क्रि॰ प्र॰—भरना । मुहा॰—पैड़ भरना = (१) किसी देवता या तीर्थ की ओर पैर नापने चलना । (२) इस प्रकार शपथ खाना । जैसे— तू सच बोलता है तो गंगा की ओर चार पैड़ भर जा ।

२. एक स्थान से उठाकर जितनी दूरी पर पैर रखा जाय उतनी दूरी । डग । पग । कदम । उ॰—तीन पैड़ धरती हौं पाऊँ परन कुटी इक छाऊँ ।—सूर (शब्द॰) ।

३. पथ । मार्ग । रास्ता । पगडंडी । उ॰—व्रजमोहन तैड़े दरस पियासियाँ पैंडरा उढीकाँ खलियाँ ।—घनानंद, पृ॰ ४८४ ।