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पैङ्ग

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पैंग वि॰ [सं॰ पैड़ग]

१. मूषक संबंधी ।

२. पिंग वर्ण का [को॰] ।

पैंग ^१ संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰] दे॰ 'पेंग' । उ॰—एक बेर निज और पैंग की होत ऊचाई । सम्हारि न सकी सयानि सरकि प्रीतम उर आई ।—रत्नाकर, भा॰, १, पृ॰ १३ ।

पैंग † ^२ संज्ञा पुं॰ [हिं॰] दे॰ 'पग' । उ॰—विश्व हमारा दिन दिन घिरकर सँकरा होता आता है । प्राणों का आहत पंछी दो पैंग नहीं नहीं उड़ पाता है ।—चिंता, पृ॰ ५४ ।