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पैया

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पैया ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ पाय्य (= निकृष्ट)]

१. बिना सत का अनाज का दाना । मारा युआ दाना । खोखला दाना । उ॰— मातु पिता कहैं सब धन तेरो मोरे लेखै पछोरल पैया ।— कबीर (शब्द॰) ।

२. खुब्ख । दीन हीन ।

पैया ^२ संज्ञा पुं॰ [देश॰] एक प्रकार का बाँस । विशेष—यह पूरबी बंगाल, चटगाँव और बरमा में बहुत होता है । इसमें बड़े बड़े फल लगते हैं जो खाए जाते हैं । बंसलोचन भी इस बांस में बहुत निकलता है । यह बाँस बहुत सीधा जाता है और गाँठें भी इसंमें दूर दूर पर होती हैं । चटगाँव में इसकी चटाइयाँ बहुत बनती हैं । घरों में भी यह लगता है । इसे मूलीमतंगा और तराई का बाँस भी कहते हैं ।

पैया ‡ ^३ संज्ञा पुं॰ [हिं॰ पहिया] दे॰ 'पहिया' ।

पैया पु ^४ संज्ञा पुं॰ [हिं॰] दे॰ 'पाँव' । उ॰—दास गरीब दरस भए, पैयन लगी जो लाय ।—कबीर मं॰ पृ॰ ५८८ ।