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पोई

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पोई ^१ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ पूतिका या पोदिक] एक लता जिसकी पत्तियों का लोग साग खाते हैं । विशेष—इसकी पत्तियाँ पान की सी गोल पर दल की मोटी होती हैं । इसमें छोटे छोटे फलों के गुच्छे लगते हैं जिन्हें पकने पर चिड़ियाँ खाती हैं । पोई दो प्रकार की होती हैं— एक काले डंठल की, दूसरी हरे डंठल की । बरसात में यह बहुत उपजाती है । पत्तियों का लोग साग खाते हैं । एक जंगली पोई भी होती है जिसकी पत्तियाँ लंबोतरी होती हैं । इसका साग अच्छा नहीं होता । पोई की लता में रेशे होते हैं जो रस्सी बटने के काम में आते हैं । वैद्यक में पोई गरम, रुचिकारक, कफवर्धक और निद्राजनक मानी गई है । पर्या॰—उपोदकी । कलंबी । पिच्छिला । मोहिनी । विशाला । मदशाका । पूतिका ।

पोई ^२ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ पोत]

१. नरम कल्ला । अंकुर ।

२. ईख का कल्ला । ईख की आँख । मुहा॰—पोई फूटना = ईख में अंकुर निकलना ।

३. गेहूँ, ज्वार, बाजरे आदि का नरम और छोटा पौधा । जई ।

४. गन्ने का पोर ।

पोई ^३ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ प्लुत या फा़॰ पोयह्] घोडे़ की एक प्रकार की चाल । दे॰ 'पोइया ^१' ।