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पोढा़

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पोढा़ वि॰ [सं॰ प्रौढ, प्रा॰ पोढ] [स्त्री॰ पोढी़]

१. पुष्ट । दृढ़ मजबूत । उ॰—कहीं छटना छाज पिटारी है कहीं बिकती खाट खटोला है । जब देख खूब तो आखिर को ना पोढी़ खाट न चरखा है ।—नजीर (शब्द॰) ।

२. दृढ़ । कडा़ । कठिन । कठोर । उ॰—तीखी हेर चीर गहि ओढा़ । कंतन हेर कीन्ह जिय पोढा़ ।—जायसी (शब्द॰) । मुहा॰—जी पोढा़ करना—जी कडा़ करना । चित्त को दृढ़ करना जिससे भय, पीडा़ दुःख आदि से विचलीत न हो ।