पौँड़ा
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]पौँड़ा संज्ञा पुं॰ [सं॰ पौण्ड्रक] एक प्रकार की बड़ी और मोटी जाति की ईख या गन्ना । विशेष—इसका छिलका कुछ कड़ा होता है पर इसमें रस बहुत अधिक होता है । यह ईख अधिकतर चूसने के काम में आती है । लोग इसके रस से गुड़, चीनी आदि नहीं बनाते । पौंड़ा दो प्रकार का होता है—सफेद और काला । सुश्रुत ने पौंडे़ को शीतल और पुष्ट कहा है । कहते हैं कि पौंड़ा पहले पहल इस देश में चीन से आया ।