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पौषा

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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पौषा † ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ पाद्, पादक हिं॰ पाव]

१. एक सेर का चौथाई भाग । सेर का चतुर्थांश । उ॰—औढ़न मेरा राम नाम, मैं रामहिं को बनजारा हो । सहस नाम को करों बनिज मैं हरि मोरा बढ़वारा हो । सहस नाम को करों पसारा दिन दिन होत सवाई हो । कान तराजू सेर तिनपौवा उह किन ढोल बजाई हो ।—कबीर (शब्द॰) ।

२. मिट्टी या काठ आदि का एक बरतन जिसमें पाव भर पानी, दूध आदि आ जाय ।

३. पान जो २६ १/२ ढोली हो । २६ १/२ ढोली पान । (तंबोली) । †

४. एक तरह का खड़ाऊँ । उ॰— पौवा अधर अधार को चलत सो पाँव पिराय ।—भीखा श॰, पृ॰ ९९ ।