प्रजारना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]प्रजारना पु † क्रि॰ स॰ [सं॰ (प्रत्य॰) प्र + हिं॰ जारना] अच्छी तरह जलाना । उ॰—(क) बाजहि ढोल देहिं सब तारी । नगर फेरि पुनि पूँछ प्रजारी ।—तुलसी (शब्द॰) । (ख) प्रब्बत प्रजारि सो करत छार ।—पृ॰ रा॰, ६ । ७४ ।
२. उद्दीप्त करना । जलाना । उ॰—विकसत नव बल्ली कुसुम निकसत परिमल पाय । परसि प्रजारति बिरह हिय बरसि रहे की वाय ।—बिहारी (शब्द॰) ।