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प्रणिघान

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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प्रणिघान संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. रखा जाना ।

२. प्रयत्न ।

३. समाधि (योग) ।

४. अत्यंत भक्ति । अति अधिक उपा- सना ।

५. ध्यान । चित्त की एकाग्रता ।

६. किसी कर्म के फल का त्याग ।

७. अर्पण ।

८. भक्ति । उ॰—दुस्वर क्या है उसे विश्व में प्राप्त जिसे प्रभु का प्रणिघान ।—साकेत, पृ॰ ३८८ ।

९. भावी जन्म के संबंध में किसी प्रकार की प्रार्थना ।

१०. प्रवेश । गति ।

११. उपयोग । प्रयोग । व्यवहार ।