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प्रतिवस्तूपमा

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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प्रतिवस्तूपमा संज्ञा पुं॰ [सं॰] वह काव्यालंकार जिसमें उपमेय और उपमा के साधारण धर्म का वर्णन अलग अलग वाक्यों में किया जाय । जैसे, सोहत भानु प्रताप सो लसत चाप सों शूर ('तापेन भ्राजते सूर्यः शूरश्चापेन राजते'— चंद्रलोक, ५ । ४८ ।) यहाँ दोहे का पूर्वार्ध उपमान वाक्य है और उत्तरादर्ध उपमेय । एक में 'सोहत' और दूसरे में 'लसत' शब्द द्वारा साधारण धर्म कहा गया है ।