प्रतिवाप
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]प्रतिवाप संज्ञा पुं॰ [सं॰]
१. ओषधियों का वह चूर्ण जो कीसी काढ़े आदि में डाला जाय ।
२. कल्क ।
३. धातु को भस्म करने का काम ।
४. चूर्ण । बुकनी ।
प्रतिवाप संज्ञा पुं॰ [सं॰]
१. ओषधियों का वह चूर्ण जो कीसी काढ़े आदि में डाला जाय ।
२. कल्क ।
३. धातु को भस्म करने का काम ।
४. चूर्ण । बुकनी ।