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प्रथन

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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प्रथन संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. एक प्रकार का गुल्म ।

२. विस्तार ।

३. प्रकाश में लाने की क्रिया या भाव ।

४. बिखराना । बिखेरना (को॰) ।

५. फेंकना (को॰) ।

६. बिखराने या फैलाने का स्थान (को॰) ।