प्रयोजन

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

प्रयोजन निकलना । मतलब गँठना । उद्देश्य सिद्ध होना । मामला ठीक होना । बात बनना । जैसे—वह इस समय यहाँ आ जाय तो हमारा काम बन जाय । काम बनाना = किसी अर्थ का साधन करना । किसी का मतलब नीका- लना । काम लगना = काम पडना । आवश्यकता होना । दरकार होना । जैसे, जब रुपए का काम लगे, तब ले लेना । काम सँवारना = काम बनाना । किसी का अर्थ- साधन करना । काम सरना = काम निकलना । काम पूरा होना । उ॰—इससे आपकी ख्याति होगी वा आपके राज्य का काम सरेगा ।—प्रेमघन॰, भा॰ २, पृ॰ ४२ । काम साधना = काम पूरा करना । प्रयोजन सिद्ध करना । काम साथ देना = सफल करना । सिद्ध करना । पूरा कर देना । उ॰—बेसधा काम साध देती है । बात सीधी हुई सादी ।— चोखे॰, पृ॰ ३१ । काम होना = प्रयोजन सिद्ध होना । अर्थ निकलना । आवश्यकता पूरी होनी । ४० गरज । वास्ता । सरोकार । लगाव । जैसे—(क) हमें अपने काम से काम । (ख) तुम्हें इन झगडों से क्या काम ? मुहा॰—किसी से काम डालना = (काम 'पडना' का प्रे॰ रुप) पाला डालना । जैसे, ईश्वर ऐसों से काम न डाले । किसी से काम पडना । किसी से पाला पडना । किसी से वास्ता पडना । किसी प्रकार का व्यवहार या संबंध होना । उ॰—चंदन पडा चमार घर नित उठि कूटै चाम । चंदन बपुरा का करै, पडा नीचे से काम ।—(शब्द॰) । काम रखना = वास्ता रखना । सरोकार रखना । लगाव रखना । जैसे—बाकी औऱ किसी बात से उन्हे काम नहीं, खाने पीने से मतलब रखते हैं । काम से काम रखना = अपने कार्य से प्रयोजन रखना । अपने प्रयोजन ही की और ध्यान रखना, व्यर्थ की बातों में न पडना । ५० उपयोग । व्यवहार । इस्तेमाल । मुहा॰—काम आना = (१) काम में आना । व्यवहार में आना । उपयोगी होना । जैसे—(क) यह पत्ती दवा के काम आती है । (ख) इसे फेंको मत, रहने दो, किसी के काम आ जायगा । २० साथ देना । सहारा देना । सहायक होना । आडे आना । जैसेविपत्ति में मित्र ही काम आते हैं । काम का = काम में आने लायक । व्यवहार योग्य । उपयोगी (वस्तु) । काम देना = व्यवहार में आना । उपयोगी होना । जैसे— यह चीज वक्त पर काम देगी, रख छोडो । (किसी वस्तु से) काम लेना = व्यवहार में लाना । उपयोग करना । बर्तना । इस्तेमाल करना । जैसे—वाह ! आप हमारी टोपी से अच्छा काम ले रहे हैं । काम में आना = व्यवहार में आना । व्यवहृत होना । बर्ता जाना । जैसे,—इस रख छोडो, किसी के काम में आ जायगी । काम में लाना = बर्तना । व्यवहार करना । उपयोग करना । ५० कारबार । व्यवसाय । रोजगार । जैसे—उन्हे कोई काम मिल जाता तो अच्छा था । क्रि॰ प्र॰ —करना । मुहा॰—कामखूलना=कारबार चलना । नया कारखाना जारी होना । नया कारबार प्रारंभ होना । काम चमकना = बहुत अच्छी तरह कारबार चलना । व्यवसाय में वृद्धि होना । रोजगार में फायदा होना । जैसे,—थोडे ही दिनों में उनका काम खूब चमक गया औऱ वह लाखों रुपए का आदमी हो गया । काम पर जाना = कार्यालय में जाना । अपने रोजगार की जगह जाना । जहाँपर कोई काम हो रहा हो, वहाँ जाना । काम बढना = काम बंद करना । नित्य के नियमीत समय पर कोई कामकाज बंद करना । जैसे,—संध्या को कारीगर काम बढाकर अपने अपने घर जाते हैं । काम बिगडना = कारबार बिगडना । व्यवसाय नष्ट होना । व्यपार में घाटा आना । काम सिखना = कार्यक्रम की शीक्षा होना । व्यवसाय या धंधा सीखना । कला सीखना । जैसे,— वह तारकाशी का काम सीख रहा है । ७० कारीगरी । बनावट । रचना । दस्तकारी । ८० बेलबूटा या नक्काशी जो कारीगरी से तैयार हो । जैसे—(क) इस टोपी पर बहुत घना काम है । (ख) दीवार पर काम उखड रहा है । यौ॰—कामदानी । कामदार । मुहा॰—काम उतारना—किसी दस्तकारी के काम को पूरा करना । कोई कारीगरी की चीज तैयार करना । काम चढना = तैयारी के लिये किसी चीज का खराद करघे, कालिब, कल आदि पर रखा जाना । काम चढना = किसी चीज की तैयारी के लिये खराद, करघे, कालिब कल आदि पर रखना या लगाना । जैसे,—कई दिनों से काम चढाया है पर, अभी तक नहीं उतरा । काम बनना = किसी वस्तु का तैयार होना । रचना या निर्माण होना ।

प्रयोजन संज्ञा पुं॰ [सं॰]

१. कार्य । काम । अर्थ । जैसे,—तुम्हारा यहाँ क्या प्रयोजन है?

२. उद्देश्य । अभिप्राय । मतलब । गरज । आशय । विशेष—न्याय में जो सोलह पदार्थ माने गए हैं उनमें 'प्रयोजन' चौथा है । जिस उद्देश्य से प्रवृत्ति होती है उसका नाम है प्रयोजन । तत्वद्दष्टि से आत्यंतिक दुःखनिवृत्ति ही संसार में मुख्य प्रयोजन है, शेष सब गौण प्रयोजन है । जैसे, भोजन के लिये हम रसोई पका रहे है, इससे भोजन करना एक प्रयोजन है, रसोई पकाने के लिये ईधन आदि इकट्ठा करते हैं इनसे रसोई बनाना भी प्रयोजन हुआ । पर जब हम इस बात का विचार करते हैं कि भोजन क्यों करते हैं तो क्षुधा के दुःख की निवृत्ति मुख्य प्रयोजन ठहरती है और शेष प्रयोजन गौण हो जाते हैं । इसी प्रकार संसार में जितने प्रयोजन हैं सांसारिक निवृत्ति के आगे वे गौण ठहरते हैं ।

३. उपयोग । व्यवहार । उ॰—यह वस्तु तुम्हारे किस प्रयोजन की है ।

४. लाभ । फायदा (को॰) ।