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प्रवरललिता

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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प्रवरललिता संज्ञा स्त्री॰ [सं॰प्रवरललित] एक वर्णवृत्त जिसके प्रत्येक चरण में यगण, मगण, नगण, सगण, रगण और एक गुरु होता है । जैसे,—यमी नासै रागादिक सकल जंजाल भाई । यहाँ ते घेरे ना प्रवरललिता ताहि जाई । अहो, मेरे मीता यदि चहहु संसार जीता । तजो सारे रागा भजहु भव- हा राम सीता ।