प्रसंगसम
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]प्रसंगसम संज्ञा पुं॰ [सं॰ प्रसङ्गसम] न्याय में जाति के अंतर्गत एक प्रकार का प्रतिषेध जो प्रतिवादी की ओर से होता है । इसमें प्रतिवादी कहता है कि साधन का भी साधन कहो और इस प्रकार वादी को उलझन में डालना चाहता है । जैसे, वादी ने कहा— प्रतिज्ञा—शब्द अनित्य है । हेतु—क्योंकि वह उत्पन्न होता है । उदाहरण—जैसे घट । इसपर प्रतिवादी कहता है कि यदि घट के उदाहरण से शब्द अनित्य ठहराते हो तो यह भी साबित करो कि घट अनित्य है । फिर जब वादी घट की अनित्यता का हेतु देता है तब प्रतिवादी कहता है कि उस हेतु का भी हेतु दो । इस प्रकार का प्रतिषेध 'प्रसंगसम' कहलाता है ।