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प्रातिशाख्य

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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प्रातिशाख्य संर्व पुं॰ [सं॰] वह ग्रंथ जिसमें वेदों की किसी शाखा के स्वर, पद, संहिता, संयुक्तवर्ण इत्यादि के उच्चारण आदि का निर्णय किया गया हो । विशेष—वेदों की प्रत्येक शाखा की संहिताओं पर एक एक प्रातिशाख्य थे और उनके कर्ताओं के मत का उल्लेख यथास्थान मिलता है । पर आजकल इस विषय के केवल पाँच छह ग्रंथ मिलते हैं ।