प्रेंखण
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]प्रेंखण संज्ञा पुं॰ [सं॰ प्रेंङ्खण]
१. अच्छा तरह हिलना या झूलना ।
२. झूला जिस पर झूलते हैं ।
३. अठारह प्रकार के रूपकों में से एक प्रकार का रूपक । विशेष— इस खपक में सूत्रधार, विष्कंभक और प्रवेशक आदि की आवश्यकता नहीं होती और इसका नायक नीच जाति का हुआ करता है । इसमें प्ररोचना और नांदी नेपथ्य में होता है और यह एक अंक में समाप्त होता है । इसमें वीररस की प्रधानता रहती है ।