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प्रौढ़पाद

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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प्रौढ़पाद संज्ञा पुं॰ [सं॰ प्रौढ़पाद] पैर के दोनों तलुए जमीन पर रखकर बैठना । उकड़ूँ बैठना । विशेष—शास्त्रों में इस प्रकार बैठकर, भोजन, स्नान, तर्पण, पूजन, अध्ययन आदि कार्य करने का निषेध है ।