फते

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

फते पु † संज्ञा स्त्री॰ [अ॰ फतह्] दे॰ 'फतह' । उ॰—(क) रणत- भवँर की फते दे, कदमु आऊँ चाह ।—ह॰ रासो, पृ॰ ८४ । (ख) सामाँ सैन सयान की सबै साहि के साथ । बाहु बली जयसाहि जू फते तिहारे हाथ ।—बिहारी (शब्द॰) । (ग) फिरयो सुफेरि साथ कों । फते निसान गाथ कों ।—सूदन (शब्द॰) ।