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फरस

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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फरस पु ^१ संज्ञा पुं॰ [अं॰ फर्श] दे॰ 'फरश' । उ॰—बैठी जस न जलूस करि फरस फबी सुखदान । पानदान तै लै दऐ पान पान प्रति पान ।—स॰ सप्तक, पृ॰ ३६४ । यौ॰—फरसबंद = दे॰ 'फरशबंद' । उ॰—कहै पद्माकर फराकत फरसबंद फहरि फुहारन की फरस फबी है फाब ।—पद्माकर (शब्द॰) ।

फरस पु ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰ परशु] दे॰ 'फरसा' । यौ॰—फरसराम = परशुराम । उ॰—फरसराम फरसी गही लग्यो षत्रियन काल ।—पृ॰ रा॰, २ । २५६ ।