फरहद
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]फरहद संज्ञा पुं॰ [सं॰ पारिभद्र,॰ पा॰ पारिभद्द, प्रा॰ पारिहिद्द] एक पेड़ का नाम जो बंगाल में समुद्र के किनारे बहुत होता है । वहाँ के लोग इसे 'पालिते मंदार' कहते हैं । विशेष—यह पेड़ थोड़े दिनों में बढ़कर तैयार हो जाता है और न बहुत बड़ा और न बहुत छओटा, मध्यम आकार का होता है । इसमें पहले काँटे होते है; पर बड़े होने पर छिलका उतरता है और स्कंध चिकना हो जाता है । किंतु डालियों में फिर भी छोटे छोटे काँटे रह जाते हैं । ढाक की पत्तियों के समान इसमें भी एक नाल में तीन तीन पत्तियाँ होती हैं । फूल लाल और सुंदर होते हैं । फूलों के झड़ जाने पर फलियाँ लगती हैं । फूलों से लाल रंग निकलता है । छाल से भी रंग निकाला जाता है और उसे कूटकर रस्सी भी बटी जाती है । इसकी लकड़ी नरम और साफ होती है और धूप में फटती या चिटकती नहीं । इसके खिलौनी आदि बनाए जाते हैं क्योकि इसपर बार्निश अच्छई खिलती है । पान के भीटों पर इसे छाया के लिये लोग लगाते हैं । पुराणों में इसे पंच देवतरु में माना है । इसे 'नहसुत' भी कहते हैं । वैद्यक में इसका स्वाद कटु, प्रकृति उष्ण और गुण अरुचि, कफ, कृमि और प्रमेह नाशक लिखा गया है । इसका फूल पित्तरोग और कर्णरोग का नाशक माना जाता है । पर्या॰—पारिभद्र । भद्रक । प्रमंदर । कंटकिंशुक । निंबतरु ।