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फरहरा

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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फरहरा ^१ संज्ञा पुं॰ [हिं॰ फहराना]

१. पताका । झंडा । उ॰— जौं शरीर आगू चलत चपल प्रान तुहि जात । मनौ वातबस फरहरा पाछे ही फहरात ।—श्यामा॰, पृ॰ ६९ ।

२. कपड़ें आदि का वह तिकोना या चौकना टुकड़ा जिसे छड़ या डंडे के सिरे पर लगाकर झंडी बनाते हैं और जो हवा के झोंड़े से उड़ता रहता है ।

फरहरा ^२ वि॰ [हिं॰ फरहर]

१. अलग अलग । स्पष्ट ।

२. शुद्ध । निर्मल ।

३. खिला हुआ । प्रसन्न ।