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फर्द

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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फर्द ^१ संज्ञा स्त्री॰ [फा॰ फर्द]

१. कागज वा कपडे़ आदि का टुकड़ा जो किसी के साथ जुड़ा वा लगा न हो ।

२. कागज का टुकड़ा जिसपर किसी वस्तु का विवरण, लेखा, सूची वा सूचना आदि लिखी गई हों या लिखी जाय । यौ॰—फर्द करारदाद जुर्म = फौजदारी की अदालत की कारे- वाई में वह लेख जिसके द्वारा न्यायाधीश वा मजिस्ट्रेट अभियुक्त व्यक्ति को किसी अपराध का अपराधी ठहराकर उससे उत्तर माँगता है । फर्दतालिका = वस्तुओं की वह सूची जो कुरकी करनेवाले को अदालत में देनी पड़ती है । फर्द सजा = फौजदारी के विभाग में वह कागज जिसपर अपराधी के दंड का विवरण वा व्यवस्था होती है । फर्दहकूक = बंदो- बस्त में वह कागज जिसमें किसी गाँव के स्वत्वाधिकारियों के स्वत्व का विवरण लिखा रहता है । फर्दहिसाब = हिसाब का लेखा या चिट्ठा ।

३. रजाई, शाल आदि का ऊपरी पल्ला जो अलग बनता ओर बिकता है । चद्दर । पल्ला । दे॰ 'फरद' ।

४. वह पशु य ा पक्षी जो जोडे़ के साथ न रहकर अलग और अकेला रहता है ।

५. परण ।

फर्द ^२ वि॰ एक । अकेला । अद्वितीय । दे॰ 'फरद' । उ॰— वह भी गाने में सारे रतनपुर की तवायफों में फर्द थीं ।—शराबी, पृ॰ १९ ।