फलंक
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]फलंक पु ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ प्लवङ्ग, हिं॰ फलाँग] दे॰ 'फलाँग' ।
फलंक ^२ संज्ञा पुं॰ [फा॰ फलक] आकाश । अंतरिक्ष । उ॰— सो है अत्र ओढे़ जे न छोडे़ सीस संगर की, लंगर लँगूर उच्च ओज के अतंका में । कहै पद्माकर त्यौ हुंकरत फुंकरत, फेलत फलात फाल बाँधत फलंका में । आगे रघुवीर के समीर के तनय के संग, तारी दै तड़ाके तड़ा तड़के तमंका में । संका त ै दसानन को, हंका दै सुबंका बीर, डंका दै विजय को कपि कूद परयौ लंका में ।—पद्माकर (शब्द॰) ।