फलदान
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]फलदान संज्ञा पुं॰ [हिं॰ फल + दान]
१. हिंदुओं की एक रीति जो विवाह होने के पहले उस समय होती है जब कोई व्यक्ति अपनी कन्या का विवाह किसी के लड़के के साथ करना निश्चित करता हैं । विशेष— इसमें कन्या का पिता रुपए, मिठाई, अक्षत, फूल आदि वस्तुएँ लोकप्रथा के अनुसार शुभ मुहूर्त में वर के घर भेजता है । उस समय विवाह निश्चित मान लिया जाता है । इसे वरक्षा भी कहते हैं ।
२. विवाह संबंधी टीके की रसम ।