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फलाँग

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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फलाँग संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ प्लवन वा प्रलङ्घन]

१. एक स्थान से उछलकर दूसरे स्थान पर जाने की क्रिया या उसका भाव । कुदान । चौकडी़ । उ॰—सुनी सिंह भय मानि अवाज । मारि फलाँग चली वह आज । —सूर (शब्द॰) । क्रि॰ प्र॰—भरना । —मारना ।

२. वह दूरी जो फलाँग से तै की जाय । उ॰— बानर सुभाव बाल केलि भूमि भानु लगि फलँगु फलाँग हूँ ते घाटि नभ तल भो । —तुलसी (शब्द॰) ।

३. मालखंभ की एक कसरत । उलटना । कलाबाजी । विशेष— यह एक प्रकार की उडान है जिसमें एक हाथ वा दोनों हाथों को जमीन पर टेककर पैरों को उठाकर चक्कर लगाते हुए दूसरी ओर भूमि पर गिरते हैं ।