फली

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

फली ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ फलिन्]

१. श्योनाक ।

२. कटहल ।

३. वह वृक्ष जिसमें फल लगते हों ।

फली ^२ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰]

१. प्रियंगुलता । विशेष—कवियों ने इसे आम की पत्नी कहा है । देखिए रघुवंश के अष्टम सर्ग का ६१ वाँ श्लोक ।

२. मूसली ।

३. अमडा़ ।

४. एक छोटी मछली । फलि (को॰) ।

फली ^३ संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ फल + ई (प्रत्य॰)] छोटे छोटे पौधों में लगनेवाले वे लंवे और चिपटे फल जिनमें गूदा नहीं होता बल्कि उसके स्थान पर एक पंक्ति में कई छोटे छोटे बीज होते हैं । विशेष—ये फल खाए नहीं जाते बल्कि कच्चे ही तरकारी आदि के काम में आते हैं । प्राय: सभी फलियाँ खाने में बहुत पौष्टिक होती हैं और सूख जाने पर पशुओं के भी खाने के काम में आती हैं । जैसे, मटर की फली, सेम की फली ।