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फसाहत

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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फसाहत संज्ञा स्त्री॰ [अ॰ फसाहत] किसी विषय का साधु और मार्जित वर्णन करना । भाषा का प्रसाद गुण । उ॰—'रसा' महवे फसाहत दोस्त क्या दुश्मन भी हैं सारे । जमाने में तेरे तजें सखुन की यादगारी है ।— भारतेंदु ग्रं॰, भा॰ २, पृ॰ ८४८ ।