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फहम

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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फहम संज्ञा स्त्री॰ [अ॰ फह्म] ज्ञान । समझ । विवेक । उ॰— (ख) फहमै आगे फहमै पाछे फहमै दाहिने डैरी । फहमै पर जो फहम करत है सोई है मेरी ।—कबीर (शब्द॰) । (ख) कलि कुचालि संतन कही सोइ सही, मोहिं कछु फहम न तरनि तमी को ।—तुलसी (शब्द॰) । (ग) आए सुक सारन बोलाए ते कहन लागे, पुलके सरीर सेना करत फहम ही ।—तुलसी (शब्द॰) ।