फाँक
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]फाँक ^१ संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ फलक या देश॰]
१. किसी गोल या पिंडाकार वस्तु का काटा या चीरा हुआ टुकड़ा । गोल मटोल वस्तु का वह खंड जो किसी सीध में बराबर काटने से अलग हो । छुरी, आरी आदि से अलग किया हुआ टुकड़ा । उ॰—छोरी बंद ि बिदा करि राजा राजा होय कि राँको । जरासंध को जोर उधेरयो फारि कियो द्वै फाँको ।—गोपाल (शब्द॰) ।
२. किसी फल का एक सिरे से दूसरे तक काटकर अलग किया हुआ टुकड़ा । जैसे, नीबू, आम, अमरूद, खरबूजे आदि की फाँक ।
३. खंड । टुकड़ा । उ॰—टघरि टघरि चामीकर के कंगूर गिरैं फटकि फरस फूटि फूटि फाँके फहराहिं ।— (शब्द॰) । विशेष—टूट टुटकर अलग होनेवाले टुकड़े के लिये इस शब्द का व्यवहार बहुत कम मिलता है ।
४. लकीरें जिनसे कोई गोल या पिंडाकार वस्तु सीधे टुकड़ों में में बँटी दिखाई दे । जैसे, खरबूजे की फाँकें ।
५. छिद्र । दरार । शिगाफ । संधि । जैसे, दरवाजे की फाँक ।