फाँद
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]फाँद ^१ संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ फाँदना] उछाल । उछलने का भाव । कूदकर जाने की क्रिया या भाव ।
फाँद † ^२ संज्ञा स्त्री॰, पुं॰ [हिं॰ फंदा] रस्सी, बाल, सूत आदि का गेरा जिसमें पड़कर कोई वस्तु बँध जाय । फंदा । पाश । उ॰— पवन पानि होइ होइ सब गरिई । पेम के फाँद कोउ जनि परई ।—जायसी ग्रं॰, पृ॰ २६४ ।
२. चिड़िया आदि फँसाने का फंदा या जाल । उ॰—(क) तीतर गीव जो फाँद है निवहिं पुकरै दोष ।—जायसी (शब्द॰) । (ख) प्रेम फाँद जो परा न छूटा । जीव दीन्ह पर फाँद न टूटा ।—जायसी (शब्द॰) । विशेष—कवियों ने इस शब्द को प्रायः पुल्लिंग ही माना है ।