फाँसना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]फाँसना क्रि॰ स॰ [सं॰ पाश, प्रा॰ फाँस]
१. बंधन में डालना । पकड़ना । पाश में बाँधना । जाल में फाँसना । उ॰—निरखि यदुवंश को रहस मन में भयो देखि अनिरुद्ध सों युद्ध माँड्यो । सूर प्रभु ठटी ज्यों भयो चाहें सो त्यों फाँसि करि कुँअर अनिरुद्ध बाँध्यो ।
२. धोखे में डालना । धोखा देकर अपने अधिकार में करना । वशीभूत करना ।
३. किसी पर ऐसा प्रभाव डालना कि वह वश में होकर कुछ करने के लिये तैयार हो जाय । जैसे,—किसी बड़े आदमी को फाँसो तब रुपया मिलेगा । संयो क्रि॰—फूँसना=फँसाना । उ॰—मनबोध हुजूर लाला कल्लू को फाँसफूँस के ले गए हैं ।—फिसाना॰, भा॰ ३, पृ॰ ५०० ।—लाना ।—लेना ।