सामग्री पर जाएँ

फाटना

विक्षनरी से

प्रकाशितकोशों से अर्थ

[सम्पादित करें]

शब्दसागर

[सम्पादित करें]

फाटना पु † क्रि॰ अ॰ [हिं॰] 'फटना' । उ॰—(क) धरती भार न अँगवे पाँव धरत उठ हाल । कर्म कूट भुइँ फाटी तिन हस्तिन की चाल ।—जायसी (शब्द॰) । (ख) दुध फाटि धृत दूधे मिला नाद जो (मिला) अकास । तन छूटै मन तहँ गया जहाँ धरी मन आस ।—कबीर (शब्द॰) । मुहा॰—फाट पड़ना †=टूट पड़ना । उ॰—दूर दूर से मरभूखे फाट पड़े ।—प्रेमघन॰, भा॰ २, पृ॰ २७४ ।