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फातिहा

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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फातिहा संज्ञा पुं॰ [अ॰ फातिहह्]

१. प्रार्थना । उ॰—कबीर काली सुंदरी होइ बैठी अल्लाह । पढ़ै फातिहा गैब का हाजिर को कहै नाहि ।—कबीर (शब्द॰) ।

२. वह चढ़ावा जो मरे हुए लोगों के नाम पर दिया जाय । जैसे,—हलवाई की दुकान और दादे का फातिहा । यौ॰—फातिहाख्वानी=फातिहा फढ़ने की रस्म । क्रि॰ प्र॰—पढ़ना ।