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फिक्र

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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फिक्र संज्ञा स्त्री॰ [अ॰ फ़िक्र]

१. चिंता । सोच । खटका । दुःख- पूर्ण ध्यान । उदास करनेवाली भावना । क्रि॰ प्र॰—करना ।—होना ।

२. ध्यान । विचार । चित्त अस्थिर करनेवाली भावना । जैसे,— काम के आगे उसे खाने पीने की भी फिक्र नहीं रहती । मुहा॰—फिक्र लगना = ऐसा ध्यान बना रहना कि चित्त अस्थिर रहे । ख्याल या खटका बना रहना ।

३. उपाय की उदुभावना । उपाय का विचार । यत्न । तदबीर । जैसे,—अब तुम अपनी फिक्र करो, हम तुम्हारी मदद नहीं कर सकते ।