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फुरकना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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फुरकना ^१ क्रि॰ स॰ [अनु॰] जुलाहों की बोली में किसी वस्तु को मुँह में चबाकर साँस के जोर से थूकना ।

फुरकना पु ^२ क्रि॰ अ॰ [हिं॰] दे॰ 'फड़कना' ^१ । उ॰—दुतियं उपमा कविता सुर कै । मनो पूर नदी हय ज्यों फुरकै ।—पृ॰ रा॰, २४ ।१९२ ।