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फुरहरी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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फुरहरी संज्ञा स्त्री॰ [अनु॰]

१. पर को फुलाकर फड़फड़ाना । उ॰—सबै उड़ान फुरहरी खाई । जो आ पंख पाँख तन लाई ।—जायसी (शब्द॰) । क्रि॰ प्र॰—लाना ।—लेना ।

२. फड़फड़ाहट । फड़कने का भाव फड़कना । उ॰—फरकि फरकि बाम बाहु फुरहरी लेत खरकि, खरकि खुलै मैन सर खोजहै ।—देव (शब्द॰) । क्रि॰ प्र॰—खाना ।—लेना ।

३. कपड़े आदि के हवा में हिलने की क्रिया या शब्द । फरफरा- हट ।

४. कँपकँपी । फुरेरी । कंप और रोमांच । दे॰ 'फुरेरी' । उ॰—नहिं अन्हाय नहिं जाय घर चित चिहुटयो तकि तीर । परमि फुरहरी लै फिरति बिहँसति घँसति न नीर ।—बिहारी (शब्द॰) । मुहा॰—फुरहरी लेना = (१) काँपना । थरथराना । (२) फड़- फड़ाना । फड़कना । (३) होशियार होना ।

५. दे॰ 'फुरेरी' ।