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फुरेरी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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फुरेरी संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ फुरफुराना]

१. सींक जिसके सिरे पर हलकी रुई लपेटी हो और जो तेल, इत्र दवा आदि में डु़बोकर काम मे लाई जाय ।

२. सरदी, भय आदि के कारण थरथराहट होना और रोंगटे खड़े होना । रोमांचयुक्त कंप । उ॰—रह रहकर शरीर पर फुरेऱी दीड़ जाती थी ।—फूली॰, पृ॰ १९ । मुहा॰—फुरेरी आना = झुझुरी होना । सरदी, ड़र आदि के कारण कँपकँपी होना । फुरेरी लेना = (१) सरदी, भय आदि के कारण काँपना । कँपकँपी के साथ रोंगटे खड़े करना । थरथराना । (२) फड़फड़ाना । फड़काना । हिलना । (३) होशियार होना । चौंकना । एकबारगी सँभल जाना ।