बकतर

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

बकतर संज्ञा पुं॰ [फा॰] एक प्रकार का जिरह या कवच जिसे योद्धा लड़ाई में पहनने है । उ॰— कबिरा लोहा एक है गढ़ने में है फेर । ताही का बकतर बना, ताही का शमशेर ।— कबीर (शब्द॰) । विशेष— यह लोहे की कड़ियों का बना हुआ जाल होता है तथा इससे गोली और तलवार से वक्षस्थल की रक्षा होती है । यौ॰— बकतरपोश = कवचधारी ।