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बग

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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बग † संज्ञा पुं॰ [सं॰ बक] बगुला । उ॰— उज्वल देखि न धीजिए बग ज्यों माँड़े ध्यान । घोरे बैठि चपेटसी, यों लै बूड़ै जान ।—कबीर (शब्द॰) ।(ख) बग उलूक झगरत गए, अवध जहाँ रघुराउ । नीक सगुन निबरहि झगर, होइहिं धरम निआउ ।— तुलसी (शब्द॰) ।